केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज असम के डेरगाँव में लचित बोरफुकन पुलिस अकादमी का लोकार्पण किया

  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने असम के डेरगाँव में लचित बोरफुकन पुलिस अकादमी का लोकार्पण किया। इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा और केन्द्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अपने संबोधन में श्री अमित शाह ने कहा कि अगले पांच वर्षों में यह अकादमी देशभर की पुलिस अकादमियों में प्रथम स्थान पर होगी। उन्होंने लचित बोरफुकन की वीरता को याद करते हुए कहा कि असम सरकार ने उनकी जीवनी को 23 भाषाओं में अनुवाद कराकर देशभर के पुस्तकालयों में उपलब्ध कराया है ताकि आने वाली पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके। उन्होंने कहा कि यह अकादमी असम ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर की पुलिसिंग के लिए एक तीर्थस्थल के रूप में विकसित होगी और शांति की नई शुरुआत करेगी।



श्री शाह ने बताया कि इस अकादमी के पहले चरण का निर्माण 167 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुआ है, जबकि तीनों चरणों में कुल 1050 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस अकादमी में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे यह पूरे भारत की सबसे बेहतरीन पुलिस अकादमी बनेगी। पहले असम की पुलिस को अन्य राज्यों में ट्रेनिंग के लिए जाना पड़ता था, लेकिन पिछले आठ वर्षों में शासन में आए बदलाव के चलते अब गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों के पुलिसकर्मी भी यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

गृह मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में असम के विकास की गति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में कई शांति समझौते किए गए हैं, जिनमें 2020 में असम-बोड़ोलैंड समझौता, 2021 में कार्बी आंगलोंग समझौता, 2022 में आदिवासी शांति समझौता, 2023 में उल्फा, असम-मेघालय और असम-अरुणाचल समझौते शामिल हैं। इन समझौतों के परिणामस्वरूप 10,000 से अधिक युवाओं ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है। असम, जो कभी आंदोलन, उग्रवाद और हिंसा के लिए चर्चा में रहता था, आज वहां 27,000 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री स्थापित हो रही है।

श्री शाह ने बताया कि हाल ही में असम में हुए निवेश सम्मेलन में 5.18 लाख करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश को जल्द ही जमीन पर उतारा जाएगा। मोदी सरकार असम के विकास के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी लेकर आ रही है। इन आठ लाख करोड़ रुपये के निवेश से असम में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने असम को पिछले दस वर्षों में 4.49 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी है, जो पिछली सरकार की तुलना में चार गुना अधिक है।

गृह मंत्री ने मोदी सरकार की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि 10,000 करोड़ रुपये की लागत से 200 किलोमीटर लंबी भारतमाला परियोजना, 3,000 करोड़ रुपये की लागत से धुबरी-फुलवाड़ी पुल, 3,400 करोड़ रुपये की लागत से सिलचर-चुराईबाड़ी कॉरिडोर फोर लेन परियोजना, 1,000 करोड़ रुपये की लागत से माजुली द्वीप पर नया तटबंध और सड़क निर्माण जैसी कई योजनाएं चल रही हैं। इसके अलावा, ब्रह्मपुत्र नदी पर 6-लेन पुल का निर्माण कार्य जारी है, 1,200 करोड़ रुपये की लागत से गोपीनाथ जी के नाम पर एक नए हवाई अड्डे का विस्तार किया जा रहा है, और 1,000 करोड़ रुपये की लागत से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्थापना की जा रही है।

श्री शाह ने गरीब कल्याण योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मोदी सरकार और असम सरकार ने मिलकर 58 लाख घरों में पहली बार नल से जल पहुंचाया, 1.80 करोड़ लोगों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज दिया, 43 लाख घरों में शौचालय बनाए, 2.32 करोड़ गरीबों को मुफ्त अनाज दिया, 51 लाख गैस सिलेंडर वितरित किए और 21 लाख गरीबों को घर उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि असम में पहले पुलिस केवल आतंकवाद से निपटने तक सीमित थी, लेकिन अब वह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने असम में न केवल शांति स्थापित करने का प्रयास किया, बल्कि इसे वास्तविकता में बदलकर दिखाया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आ रहा है, जिससे यहां के युवाओं के लिए एक स्वर्णिम भविष्य की नींव रखी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि डबल इंजन सरकार ने असम में अपराध दोष सिद्धि दर को 5% से बढ़ाकर 25% कर दिया है, जिससे कानून व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है।

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